विधायक ने 70 हजार नागरिकों का रखा पक्ष, 20 गांवों को पंचायती राज में शामिल करने पर जोर
बोकारो: बोकारो इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए दशकों पूर्व अपनी जमीनें देने वाले विस्थापित परिवारों को उनका लोकतांत्रिक अधिकार दिलाने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। सोमवार को बोकारो विधानसभा क्षेत्र के विस्थापित ग्रामों को पंचायती राज व्यवस्था में शामिल करने को लेकर एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के भू-राजस्व मंत्री दीपक बिरुआ, पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, विभाग के सचिव मनोज कुमार और बोकारो उपायुक्त अजय नाथ झा सहित जिले के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए।
इस महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान बोकारो विधायक ने विस्थापितों की समस्याओं को अत्यंत प्रखरता और तथ्यात्मक रूप से मंत्रियों के समक्ष रखा। उन्होंने अवगत कराया कि वर्ष 1956 से 1962 के बीच संयंत्र की स्थापना हेतु कुल 49 गांवों का अधिग्रहण किया गया था, जिनमें से लगभग 20 मौजाओं के रैयत आज भी अपने मूल निवास स्थलों पर ही बसे हुए हैं। विडंबना यह है कि पिछले छह दशकों से ये गांव न तो किसी ग्राम पंचायत का हिस्सा बन सके और न ही किसी नगर निकाय में शामिल किए गए। इसके परिणामस्वरूप, इन गांवों के लगभग 70,000 से अधिक नागरिक आज भी ग्राम सभा, पंचायत प्रतिनिधित्व और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक सुविधाओं से पूरी तरह वंचित हैं।
विधायक ने संविधान के अनुच्छेद 243 और झारखण्ड पंचायती राज अधिनियम, 2001 की धारा 13(1) का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए आग्रह किया कि इन गांवों को अविलंब पंचायती राज व्यवस्था के दायरे में लाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि हजारों विस्थापित परिवारों के संवैधानिक अधिकार, उनकी पहचान और सम्मान की लड़ाई है।
पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विषय की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विस्थापितों के अधिकारों के प्रति सजग है और इस दिशा में विभागीय स्तर पर सकारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार के इस सकारात्मक रुख से वर्षों से लंबित इस समस्या का जल्द समाधान होगा और विस्थापितों को स्थानीय स्वशासन की मुख्यधारा से जुड़ने का हक प्राप्त होगा।
