ग्राम रक्षा दल और पशु रक्षा समिति का होगा गठन, हाथियों के रूट में बनेंगे अंडरपास
बोकारो: जिले में लगातार बढ़ रही मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं और जनहानि को देखते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक में आमजनों की सुरक्षा और हाथियों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण को लेकर कई बड़े निर्णय लिए गए। उपायुक्त ने हाल के दिनों में हाथी हमलों में जान गंवाने वाले व्यक्तियों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उनके परिजनों को अविलंब सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि हाथी प्रभावित पंचायतों में रात्रिकालीन सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक स्तर पर सोलर लाइट, हाई मास्क लाइट और सोलर फेंसिंग (सौर बाड़) की व्यवस्था की जाएगी। उपायुक्त ने वन विभाग को निर्देश दिया है कि वे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की सूची जल्द उपलब्ध कराएं, ताकि डीएमएफटी फंड के माध्यम से इन कार्यों को गति दी जा सके। इसके साथ ही, जमीनी स्तर पर निगरानी के लिए ग्राम रक्षा दल और पशु रक्षा समिति का गठन किया जाएगा, जिनकी प्रत्येक दो माह में प्रशासनिक समीक्षा की जाएगी।
विचरण मार्गों का होगा संरक्षण, आहार की भी रहेगी व्यवस्था
हाथियों के पारंपरिक रूटों को सुरक्षित रखने के लिए उनके मार्गों के दोनों ओर बांस और अन्य उपयुक्त वनस्पतियों का वृक्षारोपण किया जाएगा। इससे हाथियों को उनके मार्ग में ही प्राकृतिक भोजन और आवरण मिल सकेगा, जिससे वे बस्तियों की ओर कम रुख करेंगे। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि इन पौधों का उपयोग निजी या व्यापारिक कार्यों के लिए पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी सड़क परियोजना के कारण हाथियों के पारंपरिक रास्तों से छेड़छाड़ न की जाए। आवश्यकतानुसार हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ‘अंडरपास’ या पुलों का निर्माण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाएगा।
अवैध उत्खनन और पेड़ों की कटाई के विरुद्ध सख्ती
बैठक में वनों के भीतर बिना साइलेंसर वाले ट्रैक्टरों के जरिए होने वाले अवैध उत्खनन और पेड़ों की कटाई पर उपायुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पुलिस और वन विभाग को निर्देश दिया कि ऐसे वाहनों को दिन में ही जब्त कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करें। वहीं, ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और वन्य उत्पादों के संवर्धन के लिए जिले में मधुमक्खी पालन और महुआ प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे और लोग वनों के संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक होंगे। बैठक में जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी नीतीश कुमार, अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी, वन पदाधिकारी संदीप शिंदे सहित कई वरीय अधिकारी और समिति सदस्य उपस्थित रहे।
