झारखंड पुलिस में शीर्ष पदों पर नियमित पदकधिकारियों की भारी कमी, कई जिम्मेदारियां प्रभार में

रांची : झारखंड पुलिस इस समय गंभीर प्रशासनिक कमी से जूझ रही है। राज्य में डीजी से लेकर एसपी रैंक तक के 14 पद पूरी तरह खाली पड़े हैं, जबकि एडीजी से एसपी स्तर के 17 अहम पद ऐसे हैं, जिनका संचालन नियमित पदाधिकारियों के बजाय प्रभार व्यवस्था के सहारे किया जा रहा है। इस स्थिति ने पुलिस संगठन की कार्यप्रणाली और निर्णय क्षमता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार झारखंड पुलिस में डीजी ट्रेनिंग, एडीजी स्पेशल ब्रांच, आईजी एसीबी, डीआईजी रांची, डीआईजी बोकारो, डीआईजी हजारीबाग, डीआईजी पलामू जैसे महत्वपूर्ण पदों पर फिलहाल स्थायी पदस्थापना नहीं है। इसके अलावा एसपी सीआईडी, एसपी स्पेशल ब्रांच, एसपी एसीबी के दो पद, एसपी होमगार्ड, कमांडेंट एसआईएसएफ और एसपी जंगल वारफेयर स्कूल भी प्रभार में संचालित हो रहे हैं, जिससे इन संवेदनशील इकाइयों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।

इतना ही नहीं, पुलिस मुख्यालय और बलों से जुड़े कई अन्य पद भी प्रभार व्यवस्था में हैं। डीजी हेडक्वार्टर, एडीजी ट्रेनिंग, एडीजी जैप, आईजी सीआईडी, आईजी दुमका जोन, एसपी एसटीएफ, कमांडेंट जैप-1 और जैप-10 के साथ-साथ आईआरबी-1, आईआरबी-2, आईआरबी-3, आईआरबी-4, आईआरबी-5, आईआरबी-9, आईआरबी-10, कमांडेंट एसआईआरबी-1 और एसपी वायरलेस जैसे पदों पर भी नियमित नियुक्ति नहीं हो सकी है।

लगातार खाली पदों और प्रभार व्यवस्था के कारण पुलिस मुख्यालय से लेकर मैदानी स्तर तक अधिकारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक इस तरह की व्यवस्था रहने से निगरानी, योजना निर्माण और जवाबदेही की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिसका असर सीधे कानून-व्यवस्था पर पड़ सकता है।

हालांकि, इस स्थिति में सुधार की उम्मीद भी जताई जा रही है। राज्य सरकार ने झारखंड पुलिस में जल्द ही एक बड़े संगठनात्मक बदलाव और पदोन्नति प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी कर ली है। प्रस्ताव के तहत 16 आईपीएस अधिकारियों को एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसपी से सेलेक्शन ग्रेड तक पदोन्नति दी जाएगी। माना जा रहा है कि इन पदोन्नतियों के बाद लंबे समय से खाली और प्रभार में चल रहे कई पदों पर नियमित नियुक्ति हो सकेगी, जिससे पुलिस संगठन को कुछ हद तक स्थिरता मिलेगी।

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